Tuesday, October 27, 2020

☺ आकांक्षाओं की चौखट पे

एक प्रेम का घेरा था ,

यूँ मेरे दिल में..

 एक आहट थी और...

 बेबसी ने घेरा था,

वो जो पूरा चांद था ..

उस दिन.. ....

कुछ अलग अधूरा था

चाँदनी थी , रात थी..

हाँ और अंधेरा था

तमन्नाओं की तारीकी में

उस दिन........

धुला धुला सवेरा था..

जो सिर्फ़ मेरा था कल तक

मेरा पागल दिल बैरी

निगोड़ा अब न मेरा था...

उड़ते गए सब होश के पंछी

यूँ अहेरी का बसेरा था 

उठती है अब ख़ाक फ़क़त

उस सूने मदफ़न में.......

एक प्रेम का जहाँ डेरा था ...

एक प्रेम का जहाँ डेरा था ...


प्रतिभा चौहान

Tuesday, October 20, 2020

 कभी किसी को मुक्कमल जहाँ नहीं मिलता

शेर अच्छा है  ,

समझ में भी आता है

पर क्या करूँ

अपनी चाहनाओं का


चाहतों पर तो

किसी का जोर नही

बस चाह लिया तुमको,  क्या करें

तुमसे मिलने की चाहत

बस जैसे हर   ख्वाहिश  की तरह

एक और ख्वाहिश


पर तुम तो ठहरे ,उफ़क

मुझ से तुम तक

का फासला तय करने को

शायद ये उम्र नाकाफ़ी गुज़रे


पर जो तमन्नाये पूरी नहीं होतीं

वो मचलना कब छोड़ती हैं


जब दुनिया से रुख़सत होना हुआ

उस वक्त भी मेरी ठहरी आखों में

लोग देख के ताज्जुब करेंगे


ये किसकी चाहत है

जो मुस्कुरा रही है


प्रतिभा

 तुम सुन रहे हो ना ?


हम्म

सुन लिया ,


क्या ?


वही

जो तुमनें  कहा


अच्छा ?

ज़रा बताओ तो

मैंने

क्या कहा ?


वही जो मैंने 

सुन लिया ।।


ओ $$

अच्छा 

रहने दो

अब 

नही बताओ


बस......


इन शब्दों को 

हम दोनों की धड़कनों 

की सम तरंगों 

पर निर्बाध

बहने दो


बोल कर

क्यों

इन शब्दों को

ब्रह्माण्ड

में भटकने के लिए

छोड़ दें


मन मे ही गूंजने दो

सिर्फ़

हमारे और तुम्हारे दरमियाँ

😊

प्रतिभा

 एक शब है जो ,

बिस्तर की सिलवटों में

छुपा के मुँह  रोती रहती है

अफसूँ देख मेरे आंसू का

सिसकते लफ़्ज़ों को धोती है


अंदाज़ लगा लेना तुम अब

मेरे साये के रिदाओं से

 तन्हाईयाँ कितनी? 

कैसी थी?

इक निगोड़ी जोगन की


उजले सुथरे कागज़ की

नियत का आलम क्या पूछो?

ख़ौफ़ के घूंघट ओढ़े है

निगारिश इस जोबन की


एक घेर हुआ था जो बाहों का

वो सर्द आहों की पनाहों का

कुछ मथुरा सा कुछ काशी सा

या कलीसा, या ढहती मीनारों सा 

या था अंधी गुफ़ाओं में

कुछ  कुछ खजुराहों सा


कान में था फिर शोर सन्नाटों सा

फिर एक क़हर सितम इज़ादों का

अब एक उजड़ती  दरिया  ,

अपने सिकुड़ते किनारों से

एक झूठी कहानी कहती है


या सच के चुल्लू में 

वो क़ैद सी रहती है

एक शब है जो ,

बिस्तर की सलवटों में

छुपा के मुँह रोती रहती है


प्रतिभा चौहान


अफसूँ = जादू , रिदा = बुत , निगारिश = तहरीर ,

 जोबन= अरुणिमा,

 इन आंखों में समा लूँ तुझे 

अधरों पर सज़ा लूँ तुझे   

धड़कनों में जब्त कर       

सुकूँ दिल का बना लूं तुझे    

प्रतिभा..

 टोटल फिलमी😀


कभी यू भी हो 

वो एक अजनबी 

जो दिल में रहता बहुत करीब 

यू ही चलते चलते राहों  

में टकरा जाए

 और

मैं 

उसको 

उसके

 अहसास ,से पहचान लूँ

फिर यू हो 

समा थोड़ा गुलाबी हो जाये 

कुछ हल्की सी बरसात हो जाये 

मैं हौले से 

उसको आवाज़ दूँ 

और फिर 

करीब आ मेरे वो

मेरी आँखों मे 

झांके

और मेरी आँखों मे

अपनी तस्वीर पा कर 

बोले

अरे तुम

और फिर 

कुछ यूं हो

सब कुछ

 ठहर जाए 

और

एक दूजे की 

बांहों के दरम्यान

धड़कनों की सरगोशियां

गूंजने लगे 

और गूंजने लगे 

कानों में

 हम दोनों का 

पसंदीदा गाना

चुप तुम रहो 

चुप हम रहें 

खामोशियों को खामोशियों से बात करने दो 


प्रतिभा

Love u zindagi

 ऐ जिंदगी  तुझसे बेहतर मुझे कोई नहीं जान सकता !!


मेरे साथ तेरा वो बेवजह मुस्कुराना…  

और मुझमें घुल कर मुझसा हो जाना !!

एक तू ही तो है जो मेरे मन को आसानी से पढ़ लेती है ….

और मेरी चाहनाओं में मंजुल तेज भर देती है। 


ऐ जिंदगी !! तुझसे बेहतर मुझे कोई नही खुश रख सकता !!


रोज इंद्रधनुषी रंगों को तू मेरे मन के कैनवास पर बिखेरती है..

और ये चटक रंग खिलखिलाते हुए मन के भीतर अलौकिक अहसास बिखेर देते हैं। 


ऐ जिंदगी तुझसे बेहतर मुझे कोई नहीं संभाल सकता !!


जब भी मैं लड़खड़ाती हूँ तू उसी क्षण अपने तजुर्बों के हाथ दे मुझे थाम लेती है….

और फिर मैं हर फिक्र को धुंए में उड़ाती हुई….

चल देती हूं तेरे साथ बेफिक्र मौज में  इठलाती हुई !!


प्रतिभा💕

Love You Zindagi

 खुद मे जब देखती हूँ 

बस तू 

सिर्फ तू 

नज़र आता है 

💞😊💞

 ओ गोरे रंग 


एक बात बताओ ,

तुमको किस बात का गुमान है 😏 

तुम्हारे रंग की वजह से जो तुमको तारीफे मिलती है न उसने तुम्हारा  भेजा खरांब कर् दिया है न?

जबकि तुमको अच्छे से पता इस रंगत को बरकरार रखने के लिये

कितने टीम टॉम करने पड़ते है 

बादाम के तेल से लेकर गरी के दूध से नहाना ताकी ये शफ्फाक रंगत यू ही चमकती रहे ।

असली मजा तो तब आता जब तुम्हारा दुश्मन दिनकर तुमको झुलसता कितनी suns cream पर पैसा  खरचना  पड़ता है ।

फिर भी तुमको सावली रंगत के लोग कमतर नजर आते,

अच्छा एक बात बताओ इस रंगत की वजह से तुमने कभी क्लास में exam में नम्बर अधिक पाये .

हैं !!......सोचो सोचो नही न 

हां.......

दो चार लम्पट ज्यादा पीछे पड़े होंगे बस ....

इस रंगत की वजह से कुछ लोगो  

में तुमने तो पर्सनालिटी डिसऑर्डर ही पैदा कर् दिया 🙄

उनको तो काले लोगो के साथ काली चीज़े भी नही पसंद यँहा तक खाने की भी रसगुल्ला पसंद गुलाब जामुन नही ,गुलाब जामुन काले हो न तुम बस इसलिए  😀

  है न funny😂


खैर क्या कहे इतरा लो अपने 

गोरे रंग पर

पर याद रखना 

गोरा रंग तो दिन में ढल जाएगा 😄😄


तुम्हारी.........

ना बताऊं तो बेहतर 

ये फाईदा तो उठा सकती 

खत किसी भी नाम से डाल सकती 

डाक विभाग ने true caller 

जैसी  व्यवस्था जो नही शुरू की

  

इजहार -ए -इश्क में हर्फ़ों को जबाँ न दो वाइज़ो
दो दिल मिल ही लेंगे दिल- ही -दिल मे  💕
#इज़हार 😊

 कुछ वादे किए नही जाते 

पर निभाएं 

शिद्दत से जातें है 

इन वादों की एक शक्ल होती है 

जिसका अक्स मन के आईने पर

चुपचाप दबे पांव उतर आता है

और इन वादों की रेशमी खुश्बू

ऐतबार की शाख पर 

फूल बन कर खिल आती है 💞


बहरहाल इन अनकहे वादों में

 एक प्यास होती है - ऐसी प्यास

जो वादे निभाने को तत्पर रहती है 🙂🙂


 तेरी बाहों की 

संदली गिरह में 

मैं इत्र सी महकती जाती हूँ

मेरी धड़कन 

लरजती ज़ुबाँ पर 

एक नज्म कहती जाती है

इश्क एक अहसास

 ❤️ #इश्क_वाला_लव ❤️


इश्क ! तुम्हे अभिव्यक्त करना

इतना आसान नही, 

पर जैसे ही आंखे बंद कर तेरे अहसास को महसूस करती हूं... उसी वक्त दिल के घाट पर मेले लग जाते हैं... 

और तुम चांद बन कर मन रूपी नदी मे उतर आते हो .... 

और जज्बात रूपी लहरों पर अठखेलियां करते 

अपनी केसरिया चांदनी टप टप मेरे दिल के ज़र्फ़ में बरसा कर लबालब भर देते हो...

और मेरे मन को यूँ सराबोर कर देते हो अपने इश्क की महक से 💖💖

मन मदमस्त हो तेरी राधा बन कालिंदी तीर, कदंब तले कृष्ण के रंग में रंग जाता है और...

मन मयूरा तुम्हारे प्रेम में लीन हो नाचने लगता है.... 

फिर सोहणी बन कर तुझको पाने की चाह में.... 

मन मेरा बहती धारा में लहरों संग उतर जाता है.... 

न जाने कितने ही रूप बदलता रहता है ये मन !!

और इश्क के हर अहसास को जीता रहता पर !!

पर अभिव्यक्त नही कर पाता इन अनुभूतियों को...

क्योंकि इश्क तो एक अहसास है ... 

रूह से रूह को महसूस करने का... है न इश्क़ !! 💞

#प्रतिभा

एक सुबह बाकी है

 .............एक सुबह बाकी है.......


एक सर्द रात 

और...मैं

चाँदनी और उसके

 सायों के अंधेरे

कुछ जुगनुओं के शोर

मेरे मन के चित चोर

वो बंजारे मेरी आस के

चुभते टुकड़े मेरी प्यास के

तन्हाईयों के उड़ते पंछी

एक जोश का मज़ार

उस पे ओस का ग़िलाफ़

बे ज़ुबाँ खामोशी

बे लफ्ज़ काँपते होंठ

आँख के काजल का सैलाब

हया की वो सब लबीरे

जिस्म की बेख़ौफ़ लकीरें

फकत एक सहर की आहट

मेरी आँखों में आज भी

जागती है ,

हाँ....

 जागती है वो

जिसकी आज भी

एक सुबह बाकी है....


#प्रतिभा_चौहान

यू बे-हिज़ाब होना

 यूँ  बे-हिजाब होना

                  ...........................

यूँ  बे-हिजाब होना

खुले आसमान में

अधूरा महताब होना

शबनम और गुलाब

गुलाब की 

नर्म-नर्म पत्तियां 

और....

शबनम का यूँ शराब होना

भँवरा और उसका शौक

और ...

शौक का यूँ कामियाब होना

जीवन के तलातुम में

एक हवा का झौंका ,

एक ख्याल 

एक ख्याल का धोका 

और ...

ज़र्रे का यूँ आफ़ताब होना

एक नज़र गुनाह

एक नज़र काफिर 

काफ़िर का बे जवाब होना

और..

क़यामत है

एक गुनाह से हदे गुनाह तक

सलीके से 

एक सलीके का

यूँ खराब होना

और...

क़यामत है

चान्दनी के कतरों से

जुगनू की हथेली पे

एक सैलाब होना

औऱ....

क़यामत है...

इश्क में इश्क को

यूँ दस्तेयाब होना

क़यामत है ...

हुस्न का 

यूँ बे -हिजाब होना..


( #प्रतिभा_चौहान )

 नीला रंग.....

इस रंग में अपना अकेलापन बहुत खूबसूरत लगता है ।

जैसे नीले सहरा में तन्हा चांद

बस यूं ही 

इश्क वाला लव

 ग्याहरवीं मंजिल पे

खिड़की से झांकती हवा 

भीतर प्रवेश करके 

उसकी देह को सहला रही थी


और

वह

उसकी सिहरती देह में

 उंगलियों से 

उकेर रहा था 

अपना स्पर्श


हुसैन की पेंटिंग्स की तरह

उसके 

श्याम तन के कैनवास पर

कई रंग 

 उतार चढ़ाव के लिए मचल रहे थे 


पर 

उसकी आंखें 

वो तो पढ़ रही थी 

उसके चहरे पर 

लिखा

 वो

पारदर्शी वाक्य

जो बना था

 मिल कर ढाई आखर से


*प्रतिभा*😊

अहसास

 खिड़की की ओट में

वो हवा का झोंका

देह को छू कर गुज़रा

और रुह तक जा गुज़रा


और..


तुम और तुम्हारी याद

 मेरे बदन की सिरहन से

वाक़िफ़ होती रही

बदहवासी अपनी

 उंगलियों से 

उकेर रही थी

Mural


वो murals

उसके रंग और सुगंध...

और

देह पर

कई रंगोलियों की 

वही पुरानी जुस्तजू

कुछ दर्दों के झमेले

फिर

वही अकेली खिड़की

और...


और...

 हम अकेले


दूर तक ठहराव देर तक

खामोशी और...

 उतार चढ़ाव 

यादों की सलवटें

कराहटें और 

उसकी आंखें और उनमें

वही दर्द

जिन्हें  पढ़ रही थी 

उसके चहरे पर 

लिखा

 वो

पारदर्शी वाक्य

जो बना था

 #इश्क_वाला_लव


#प्रतिभा_चौहान

अधूरा प्रेम

 अधूरा प्रेम


इस प्रेम को बचा लेना चाहती हूं

अपने भीतर 

संभावित आकांक्षाओं के संसार की तरह

जहां,,इच्छाओं की देहरी पर खड़े होकर

तुमसे  आलिंगनबद्ध होकर 

करना चाहती हूं 

चाहनाओ की दुनिया की 

पूरी परिक्रमा

हमारे अधूरे प्रेम के साथ


#प्रतिभा_चौहान

प्रेम

 सुनो न 

चलो

मुक्त हो उड़ान भरते 

और पहुच जाते हैं

क्षितिज के पार 

आसमा से दूर 

उसी

चश्में  के पास 

जिसके करीब बहती है

एक शहद की नदी 

वंही  शीतल अहसास बन 

सौप दूँगी

मैं अपना वसंत

और तुम्हारे स्पर्श 

के सौंधेपन से

महक उठेगा 

मन

और 

वंही...

शहद की नदी के किनारे

बो देंगे

अपने 

अभिसार के पलो को

जिससे उपजेंगे

प्रेम के नए स्रोत 

 जो देंगे

प्रेम-सुख को अर्थ

जो आत्मा से उपजता है

देह से परे जाकर


प्रतिभा

होंठ

 इक जिंदगी के राज को मेरे छुपाए होंठ कमबख्त ने इस तरह से मेरे दबाए होंठ उफ्फ फो दम ही निकल जाता  मेरा बैरी  ने  जो होंठों से मेरे मिलाए  हों...