Tuesday, October 20, 2020

एक सुबह बाकी है

 .............एक सुबह बाकी है.......


एक सर्द रात 

और...मैं

चाँदनी और उसके

 सायों के अंधेरे

कुछ जुगनुओं के शोर

मेरे मन के चित चोर

वो बंजारे मेरी आस के

चुभते टुकड़े मेरी प्यास के

तन्हाईयों के उड़ते पंछी

एक जोश का मज़ार

उस पे ओस का ग़िलाफ़

बे ज़ुबाँ खामोशी

बे लफ्ज़ काँपते होंठ

आँख के काजल का सैलाब

हया की वो सब लबीरे

जिस्म की बेख़ौफ़ लकीरें

फकत एक सहर की आहट

मेरी आँखों में आज भी

जागती है ,

हाँ....

 जागती है वो

जिसकी आज भी

एक सुबह बाकी है....


#प्रतिभा_चौहान

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