Tuesday, October 20, 2020

 तेरी बाहों की 

संदली गिरह में 

मैं इत्र सी महकती जाती हूँ

मेरी धड़कन 

लरजती ज़ुबाँ पर 

एक नज्म कहती जाती है

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होंठ

 इक जिंदगी के राज को मेरे छुपाए होंठ कमबख्त ने इस तरह से मेरे दबाए होंठ उफ्फ फो दम ही निकल जाता  मेरा बैरी  ने  जो होंठों से मेरे मिलाए  हों...