तेरी बाहों की
संदली गिरह में
मैं इत्र सी महकती जाती हूँ
मेरी धड़कन
लरजती ज़ुबाँ पर
एक नज्म कहती जाती है
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इक जिंदगी के राज को मेरे छुपाए होंठ कमबख्त ने इस तरह से मेरे दबाए होंठ उफ्फ फो दम ही निकल जाता मेरा बैरी ने जो होंठों से मेरे मिलाए हों...
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