जो मेरे आंगन आती
रोज चिरैय्या
उसी से अक्सर
बात करती हूं
कह नही पाती
किसी से जब हाल ऐ दिल
उसी से बयाँ करती हूं
दाने की जगह
अपनी परेशानियों
को बिखेर देती हूं
और वो
चुप से
मेरे गिले शिकवे
चुन चुन
चुगती रहती है
पर वो अपना
दर्द कैसे कहे
किसको बताये
प्रतिभा
रोज चिरैय्या
उसी से अक्सर
बात करती हूं
कह नही पाती
किसी से जब हाल ऐ दिल
उसी से बयाँ करती हूं
दाने की जगह
अपनी परेशानियों
को बिखेर देती हूं
और वो
चुप से
मेरे गिले शिकवे
चुन चुन
चुगती रहती है
पर वो अपना
दर्द कैसे कहे
किसको बताये
प्रतिभा
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