मातृत्व ---
शाश्वत आनंदमयी
अनुभूति,
परिभाषित
सम्पूर्ण तृप्ति,
प्रगाढ़ता
स्त्री -पुरुष के
सम्बन्धो की,
है आधार
उर्वरक धरा का,
सृष्टि रचियता
व अपरा का,
आधारों का मूल्य
रोपित करता
अति सूक्ष्म बीज
नेह जल सींचता
नवांकुर को
और होता है
नए रूप में
प्रादुर्भाव
मातृत्व की
अनुभूति का
#प्रतिभा_चौहान
शाश्वत आनंदमयी
अनुभूति,
परिभाषित
सम्पूर्ण तृप्ति,
प्रगाढ़ता
स्त्री -पुरुष के
सम्बन्धो की,
है आधार
उर्वरक धरा का,
सृष्टि रचियता
व अपरा का,
आधारों का मूल्य
रोपित करता
अति सूक्ष्म बीज
नेह जल सींचता
नवांकुर को
और होता है
नए रूप में
प्रादुर्भाव
मातृत्व की
अनुभूति का
#प्रतिभा_चौहान
No comments:
Post a Comment