Friday, July 19, 2019

एक नई कविता फिर से
वही मत सोचना फिर से
काम तुम्हारे की तारीफ
मैं कर रहा हूँ फिर से
छू गयी वो पुनः आसमान
वो है प्रतिभा चौहान।।

कुछ लूट सा गया था
कुछ रूठ सा गया था
दरीचे पे पत्थर आया
कांच टूट सा गया था
दरवाजा खोल करे अहसान
वो है प्रतिभा चौहान।।

गमो में खुशी की छाया
बादलों में चांद आया
धूप में छाते जैसी
गहरी है जिसकी माया
टूटी दोस्ती की परवान
वो है प्रतिभा चौहान।।

कहानी नई लिख रहा
कविता फिर गढ़ रहा
दोष न देना फिर मुझे
झाड़ चने पर  चढ़ रहा
सोच सोच होये हलकान
वो है प्रतिभा चौहान।।

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