जिंदगी-------
अपने रुपहले कैनवास पर
कई रंग बिखेरती
चटक रंग
खिलखिलाते हुए
होठों पर
बिखर कर
मन के भीतर
सतरंगी अहसास
उड़ेल देते
जो कभी फीके
और तीखे होकर
सांसो की लय ताल पर
चढ़ते और उतरते
और अचानक
कभी
ये खिलखिलाते रंग
मन पटल पर
खामोश हो
बैठ जाते
आंखों से ढलक
अंजुरी में भर जाते
और
ये झर झर बूँदे
फैल जाती
मेरे आँचल में
मोती बनके
हर रंग से सज कर
जिंदगी का
ये कारवां
यूँ ही
चलता रहता
और इठला कर्
मुझे
पीछे पीछे
चलने को लुभाता
रहता ।
#प्रतिभा_
अपने रुपहले कैनवास पर
कई रंग बिखेरती
चटक रंग
खिलखिलाते हुए
होठों पर
बिखर कर
मन के भीतर
सतरंगी अहसास
उड़ेल देते
जो कभी फीके
और तीखे होकर
सांसो की लय ताल पर
चढ़ते और उतरते
और अचानक
कभी
ये खिलखिलाते रंग
मन पटल पर
खामोश हो
बैठ जाते
आंखों से ढलक
अंजुरी में भर जाते
और
ये झर झर बूँदे
फैल जाती
मेरे आँचल में
मोती बनके
हर रंग से सज कर
जिंदगी का
ये कारवां
यूँ ही
चलता रहता
और इठला कर्
मुझे
पीछे पीछे
चलने को लुभाता
रहता ।
#प्रतिभा_
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