तुम संग बिताये
जो क्षण ....है गिनती के
उनकी यादों से बढ़कर
पर ...कोई आनंद नही है
तुम्हे छोड़कर अब कुछ सोचे
मन ... इतना स्वच्छंद नही है
सांस में बस गयी सुगंध तुम्हारी
रोम रोम में बिखरा प्यार तुम्हारा
हर पल महसूस करता है
अंग अंग स्पर्श तुम्हारा
तुम्हे छोड़कर... अब कुछ सोचे
मन ...इतना स्वच्छंद नही है
माना दूर हो मुझसे
पर बहुत करीब हो मन के
बिना किसी बन्धन के
बांध लिया है इस जीवन से
तुम्हे छोड़कर अब कुछ सोचे
मन ....इतना स्वच्छंद नही है ।।
😊प्रतिभा😊
जो क्षण ....है गिनती के
उनकी यादों से बढ़कर
पर ...कोई आनंद नही है
तुम्हे छोड़कर अब कुछ सोचे
मन ... इतना स्वच्छंद नही है
सांस में बस गयी सुगंध तुम्हारी
रोम रोम में बिखरा प्यार तुम्हारा
हर पल महसूस करता है
अंग अंग स्पर्श तुम्हारा
तुम्हे छोड़कर... अब कुछ सोचे
मन ...इतना स्वच्छंद नही है
माना दूर हो मुझसे
पर बहुत करीब हो मन के
बिना किसी बन्धन के
बांध लिया है इस जीवन से
तुम्हे छोड़कर अब कुछ सोचे
मन ....इतना स्वच्छंद नही है ।।
😊प्रतिभा😊
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