Friday, July 19, 2019

2 बरस पहले लिखी थी
आज नजर पड़ गयी तो पोस्ट कर दी
😃😃😃

फिजाओं का रंग
बदला बदला है
ठूठ हुए अल्फाज को
आवाज .....
अब पहचानती नही
किरदार बदले
कपड़े की  तरह
अपने ही
साये को....
अब जानती नही
दिल पर चढ़ा
सलेटी रंग
गमो का ऐसे
तन्हाई  में भी
सिसकी ....
अब निकालती नही
धुंधले हुए है सफे
जिंदगी की  किताब के
पलटते वर्कों के हर्फ़ों
की जुबां ...
अब मचलती नही
छन छन कर
 आता था कभी वो
मखमली ख्वाबो में
यादे  भी उसकी
बाँहो से ...
अब लिपटती नही

#प्रतिभा

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