Friday, July 19, 2019

कुछ न कहो ~
बस ! कुछ न कहो !!
जिक्र न छेड़ो बेकसी  का ~
न बेकली की कोई नज्म दोहराओ!
क्या हुआ ? क्या होगा ?
इन बेतुके सवालो को छोड़ ~
बेबसी के दायरों से निकल कर ,
इन अजनबी से रास्तो पर ~
कुछ दूर तलक ही सही ~
यूँ खामोश मेरे साथ चलो !!
तन्हाई को मिला देने दो हमे ~
कुछ पल के लिए ही सही ,
ये मुलाकात हो जाने दो ।
कुछ न कहो !!
बस ! कुछ न कहो !!

©️ प्रतिभा

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