Friday, July 19, 2019

इश्क़ के गलीचे पर बिखरी चांदनी...
धड़कनो की ताल पर शबनम  की बूंदों को…
पाज़ेब बना कर..
  जब जब रक्स करती !!
तब तब ख्वाबो की बारहदरी पर...
उतर कर चाँद बिखरी चांदनी को..
समेट लेता अपनी बांहों में !!
मिलती आपस मे धड़कन ,
और हौले हौले बढ़ते उर स्पंदन...
बन  मृदु लय..............
 बढ़ती साँसों की *धनक* !!
फिर बादलों की करतल पर..
प्रारम्भ होता.......
*#रक्स_ए_इश्क़*
...................
 ©️ प्रतिभा

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होंठ

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