तमाम शब
निज
दृगों से
जल बहाकर
किसने
भोर का आँचल
भिगोया है
पर्ण कोरो से टपकते
ये किसकी अश्रुमाला
के टूटे मोती हैं
किसकी ह्रदय पीड़ा को
पुष्प ने अपनी
पंखुरियों में संजोया है
किस दर्द से गुजर
ये कौंन रोया है
ऐ निशा तू ही बता
किसने ये
भोर का आँचल
भिगोया है ।।
प्रतिभा
निज
दृगों से
जल बहाकर
किसने
भोर का आँचल
भिगोया है
पर्ण कोरो से टपकते
ये किसकी अश्रुमाला
के टूटे मोती हैं
किसकी ह्रदय पीड़ा को
पुष्प ने अपनी
पंखुरियों में संजोया है
किस दर्द से गुजर
ये कौंन रोया है
ऐ निशा तू ही बता
किसने ये
भोर का आँचल
भिगोया है ।।
प्रतिभा
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