Friday, July 19, 2019

वो जो चुप्प रहता है

अपनी इस चुप्पी से -

महाकाव्य लिखता है ,

घिरती जब घटा घनघोर

टप टप बूंदों के संगीत पर

मारुत- स्पर्श सुखद

- मृदु अनुभूतियाँ धरता है ,

अपनी इसी चुप्पी से

महाकाव्य लिखता है ,

कल-कल छल-छल

कोलाहल सरिता का

चल देती जब

सिंधु-मिलन को

हो मगन

सरिता के इस

उतावलेपन को देख ,

मद्विम मुस्काता है

अपनी इस चुप्पी से

महाकाव्य लिखता है ,

जब आकाश धरा

और हो जाये सबकुछ

कुछ धूमिल-कुछ सतरंगा

जानो कि  मुखर छन्द

वो भाँति-भाँति रचता है ,

अपनी इस चुप्पी से

महाकाव्य रचता है

वो जो चुप्प रहता है ।।

प्रतिभा चौहान

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