Friday, July 19, 2019

जल-बून्द से जैसे -
रश्मि कोई प्रतिबिम्बित ,
वैसे ही बसे
तुम
प्रियतम मेरे चित
अर्पित करूँ
हर सांस तुमपर
करू तुमसे राधा सी प्रीत
तुम्हारे मन क्यारी को
सदा करूँ
स्नेह रस से सिंचित
पर निज भाव
छुपाते तुम
यह नेह
की नही रीत
उर में पीड़ा
एकाकीपन लिए
 तरुणाई मेरी
तुम्हारे प्रेंम से वंचित
चुक गए शब्द सारे
बचा न कुछ शेष
बन जाओ बस मेरे मीत
मनवीणा हो
झंकृत
बने फ़िर नवगीत
प्रतिभा

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