Friday, July 19, 2019

काश...
तुम्हारी बांहों में
थोड़ा  ठहरती
अपना यौवन
औऱ गढ़ लेती

अपनी उठती
घटती सांसों की
सरगोशियां
और सुन लेती
काश...
तुम्हारी बांहों में
थोड़ाऔर ठहर लेती

खनकती चूड़ियों से
तुम्हारी धड़कनों को
और खनकने देती
काश...
तुम्हारी बांहों में
थोड़ाऔऱ ठहर लेती

तुम्हारी शरारतों
से अपनी काया
को और
बहकने देती
काश..
तुम्हारी
बांहों में
थोड़ा और ठहर लेती

तुम्हारी छुअन से
करधनी की
व्याकुलता
औऱ बढ़ने देती
काश...
तुम्हारी बांहों मे
थोड़ाऔर ठहर लेती

रैन थोड़ीऔर
बढ़ने देती
कजरा -गजरा
और बिखरने देती
काश..
तुम्हारी
बांहों
में थोड़ा और
ठहर लेती

काश....
थोड़ा और
अपने यौवन को
गढ़ लेती😊

प्रतिभा

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