कुछ शोख नज़रें हैं ~
इन शोख नज़रों की
अंगड़ाई से बचना तुम
जो बिखरी रहती है
अक्सर मंद मंद मुस्कान ~
होठो पे फैली इस
हरजाई से बचना तुम
मुश्किल तो है
इज़हारे इश्क करना
इस आतिशे इश्क़ की
रुस्वाई से बचना तुम
यूँ तो ख़्याल बस
एक ख़्याल ठहरा ~
यूँ भी अक्सर करना तुम
तन्हा हो के अपनी ही
तन्हाई से बचना तुम
खो देना खुद को कभी
औऱ खुद को मिल जाना तुम
इस ओह पोह में यार....अपनी ही
परछाई से बचना तुम
दर्द के हिस्से में तुम
गर आ जाओ जब
सबसे घुलना मिलना
चलना फिरना करना सब
मगर...अक्सर ध्यान धरना ये
कि शब्द मीनाई से बचना तुम
दीवाना दीवाना कहता फिरे जो
मुकर्रर इतना सा करना
उस शैदा की भी
शैदाायी से भी बचना तुम
कुछ शोख नज़रें हैं ~
इन शोख नज़रों की
अंगड़ाई से बचना तुम
इन शोख नज़रों की
अंगड़ाई से बचना तुम
जो बिखरी रहती है
अक्सर मंद मंद मुस्कान ~
होठो पे फैली इस
हरजाई से बचना तुम
मुश्किल तो है
इज़हारे इश्क करना
इस आतिशे इश्क़ की
रुस्वाई से बचना तुम
यूँ तो ख़्याल बस
एक ख़्याल ठहरा ~
यूँ भी अक्सर करना तुम
तन्हा हो के अपनी ही
तन्हाई से बचना तुम
खो देना खुद को कभी
औऱ खुद को मिल जाना तुम
इस ओह पोह में यार....अपनी ही
परछाई से बचना तुम
दर्द के हिस्से में तुम
गर आ जाओ जब
सबसे घुलना मिलना
चलना फिरना करना सब
मगर...अक्सर ध्यान धरना ये
कि शब्द मीनाई से बचना तुम
दीवाना दीवाना कहता फिरे जो
मुकर्रर इतना सा करना
उस शैदा की भी
शैदाायी से भी बचना तुम
कुछ शोख नज़रें हैं ~
इन शोख नज़रों की
अंगड़ाई से बचना तुम
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