Friday, July 19, 2019

मैं ,
तुम्हारा पहरों इंतज़ार किया करती हूं ,
ये इंतज़ार के  एक - एक पल भी न ,
मानो ,
जैसे रिमझिम फुहारे हैं…
जो ,
मेरे मन के मरुस्थल की
तपती रेत को ,
भिगोते हुए
ठंडी सिहरन देते रहते हैं ,

ये इंतज़ार का सिलसिला
जो ,
तेरे - मेरे दरमियान है ,
इक डोर हैै वो ----
जज़्बातों  की ,
चंद एहसासों की ,
यही तो है जो ----
बांधे हैं दोनों को इक सिरे से ,
प्रेम की डोर
हम्म $$$
प्रेम की ही डोर
है ना --------😊

ये जो रेशमी अहसास है …
वही
ख्वाबों में भी
साथ बनाये रखता है
मेरा तुम्हारा
और ,
महका देता है प्रेम के मधुमास को

उफ़्फ़ ,
अब ये इंतज़ार
लंबा होता जा रहा है
पल ----
घड़ी में
और
घड़ी
महीनों में
बदल रही है
पर
एक सुकून है
जी रहे है साथ
हम दोनों
इस इंतज़ार को

हम
मिलेंगे किसी दिन..
पर
अभी जी लेने दो साथ में
इस इंतज़ार को
इस चाह को.....
मीठी कसक के साथ

प्रतिभा

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