ये इन नूपुरों की खनक है
या तुम्हारी बेतहाशा मचलती धड़कनों की आहट !!
खुशरंग हिना की चमक है
या तेज़ साँसों की गर्माहट !!
मैं कैसे यकीन कर लूं की तुम नही हो
जब तुम्हारा ही नशा पुरज़ोर है !!
खुद को कैसे राहत दिलाऊं
जब मुहब्ब्त का दौर ही चितचोर है 💞
प्रतिभा चौहान
या तुम्हारी बेतहाशा मचलती धड़कनों की आहट !!
खुशरंग हिना की चमक है
या तेज़ साँसों की गर्माहट !!
मैं कैसे यकीन कर लूं की तुम नही हो
जब तुम्हारा ही नशा पुरज़ोर है !!
खुद को कैसे राहत दिलाऊं
जब मुहब्ब्त का दौर ही चितचोर है 💞
प्रतिभा चौहान
No comments:
Post a Comment