Friday, July 19, 2019

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तुम पर तो मै देखना कभी बेहिसाब लिखूंगी ।
ना कोई देखे न समझे  वो किताब लिखूंगी  ।।

मौन की भाषा अश्कों की अदृश्य स्याही से ।
हे प्रिये ! प्रणय निवेदन मै कोई खास लिखूंगी  ।

नीले फलक पर श्वेत हंसो को सजा कर  ।
हे प्रिय! तुम्हारा नाम  मै अपने साथ लिखूंगी ।।
                                                        प्रतिभा

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होंठ

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