....
तुम पर तो मै देखना कभी बेहिसाब लिखूंगी ।
ना कोई देखे न समझे वो किताब लिखूंगी ।।
मौन की भाषा अश्कों की अदृश्य स्याही से ।
हे प्रिये ! प्रणय निवेदन मै कोई खास लिखूंगी ।
नीले फलक पर श्वेत हंसो को सजा कर ।
हे प्रिय! तुम्हारा नाम मै अपने साथ लिखूंगी ।।
प्रतिभा
तुम पर तो मै देखना कभी बेहिसाब लिखूंगी ।
ना कोई देखे न समझे वो किताब लिखूंगी ।।
मौन की भाषा अश्कों की अदृश्य स्याही से ।
हे प्रिये ! प्रणय निवेदन मै कोई खास लिखूंगी ।
नीले फलक पर श्वेत हंसो को सजा कर ।
हे प्रिय! तुम्हारा नाम मै अपने साथ लिखूंगी ।।
प्रतिभा
No comments:
Post a Comment