रात बहुत दिनों बाद
कमरे में मेरे
चाँद उतरा
लिए साथ आया
अपने वो
वही अहसास
निकाले मैंने भी
सिरहाने से
तकिए तले
सहेजे हुए
वो पल
वो याद
छेड़ता रहा वो
बात
नयी और
कुछ पुरानी
देती रही
में भी साथ
और
रखती रही
तकिए तले
छिपा कर
फिर से ,
उसके साथ
गुजारे क्षणों
की सौगात
और
फिर
आकाश
होने लगा दूधिया
और वो
उसी झरोखे से
जा वापस
कंही खो
गया
और मैं
उस मेहमान
के साथ
अगली
मुलाकात
का स्वप्न
सजा
अपने स्वप्न
से निकल
झरोखे से
बाहर देखने लगी ।।
#प्रतिभा
कमरे में मेरे
चाँद उतरा
लिए साथ आया
अपने वो
वही अहसास
निकाले मैंने भी
सिरहाने से
तकिए तले
सहेजे हुए
वो पल
वो याद
छेड़ता रहा वो
बात
नयी और
कुछ पुरानी
देती रही
में भी साथ
और
रखती रही
तकिए तले
छिपा कर
फिर से ,
उसके साथ
गुजारे क्षणों
की सौगात
और
फिर
आकाश
होने लगा दूधिया
और वो
उसी झरोखे से
जा वापस
कंही खो
गया
और मैं
उस मेहमान
के साथ
अगली
मुलाकात
का स्वप्न
सजा
अपने स्वप्न
से निकल
झरोखे से
बाहर देखने लगी ।।
#प्रतिभा
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