Friday, July 19, 2019

खेलन आओ
फाग सजन

मार रंग से भरी
पिचकारी
कर दे
कोरी
चुनरिया
मेरी
इंद्रधनुष सी
सतरंगी
निराली

रंगों से कर के
सराबोर
मुझे
बना दे
मुझको
रंग
रंगीली
रूपाली

गाल चढ़ा
गुलाल
लाल लाल
और
ओठ पर लगा
पलाश फूल
से लाली
रंग इतने
रंगों से
आज सजन
दिखू  मै
सबसे
मतवाली

चढ़े न
कोई
दूजा रंग
हो ऐसे
चटकते
गाढ़े
तेरे
प्रीत के रंग
से रँगी
मेरी होली

खेलें
आओ
मिल कर
फाग सजन

प्रतिभा

No comments:

होंठ

 इक जिंदगी के राज को मेरे छुपाए होंठ कमबख्त ने इस तरह से मेरे दबाए होंठ उफ्फ फो दम ही निकल जाता  मेरा बैरी  ने  जो होंठों से मेरे मिलाए  हों...