एक तरुणी सुकोमल
नयन जिसके चंचल
अधर जिसके रसीले
अंग अंग हैं नशीले
खेलती घने केशो से
कुछ खोयी खोयी सी
बैठी एक उपवन में
बात लिए कुछ मन मे
चमेली सी सुगंधित
स्वास , गुंजन बढ़ा रही
चंचल मधुपो का
देख ये दृश्य आतुर हुआ
क्यों वंही गया थम ?
वो नटखट हवा का झोंका
किसने इसको रोका?
मदहोश,मदमस्त हो होकर
उस शोख रक्त कली के आ पास
छू लेता तन
और चन्द्र मुख पर रख देता चुम्बन
और उसके हठीले नयनो में
अपलक निहारता
देख् नेह का उजियारा
मृगनैनी रसीले नयन झुका
मूक आमंत्रण लेती मान
और बह चलती
पेड़ो की डाली पर झूलती हुई
सिंधु की लहरों से खेलती हूई
आनंदित हो,
मलंग समीर के संग
सुगंधित करने
सारा चमन
---------------
प्रतिभा चौहान
नयन जिसके चंचल
अधर जिसके रसीले
अंग अंग हैं नशीले
खेलती घने केशो से
कुछ खोयी खोयी सी
बैठी एक उपवन में
बात लिए कुछ मन मे
चमेली सी सुगंधित
स्वास , गुंजन बढ़ा रही
चंचल मधुपो का
देख ये दृश्य आतुर हुआ
क्यों वंही गया थम ?
वो नटखट हवा का झोंका
किसने इसको रोका?
मदहोश,मदमस्त हो होकर
उस शोख रक्त कली के आ पास
छू लेता तन
और चन्द्र मुख पर रख देता चुम्बन
और उसके हठीले नयनो में
अपलक निहारता
देख् नेह का उजियारा
मृगनैनी रसीले नयन झुका
मूक आमंत्रण लेती मान
और बह चलती
पेड़ो की डाली पर झूलती हुई
सिंधु की लहरों से खेलती हूई
आनंदित हो,
मलंग समीर के संग
सुगंधित करने
सारा चमन
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प्रतिभा चौहान
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