इश्क का पैमाना भर कर ,
जब से ये नशा किया है ~
कुछ मीरा सी जोगन बन गयी ,
तो कुछ राधा सी बावरी !!
इस प्रेम खुमार में बस
तुम्हे ही सोच मंद मंद मुस्काती हूं ।
बिन कोई बात नयन छलकाती हूं ।
प्रेम-गीत बना तुमको,
अधरों पर गुनगुनाती हूं ।
तुम्हारी ललित छवि नयनन में समा,
पलक ढाप एकटक निहारतीं हूं ।
पहरों एकांत में तुम से ही बतियाती हूं ।
और तुम्हारे मन को,
अपने तन की देहरी तक ला,
उससे उठती गंध को आत्मसात कर ,
' मैं '- ' तुम ' बनती जाती हूँ ।
और देह मेरी मानो बेजान
होती जाती है ~ प्रेम रस ❣️❣️
©️ प्रतिभा
जब से ये नशा किया है ~
कुछ मीरा सी जोगन बन गयी ,
तो कुछ राधा सी बावरी !!
इस प्रेम खुमार में बस
तुम्हे ही सोच मंद मंद मुस्काती हूं ।
बिन कोई बात नयन छलकाती हूं ।
प्रेम-गीत बना तुमको,
अधरों पर गुनगुनाती हूं ।
तुम्हारी ललित छवि नयनन में समा,
पलक ढाप एकटक निहारतीं हूं ।
पहरों एकांत में तुम से ही बतियाती हूं ।
और तुम्हारे मन को,
अपने तन की देहरी तक ला,
उससे उठती गंध को आत्मसात कर ,
' मैं '- ' तुम ' बनती जाती हूँ ।
और देह मेरी मानो बेजान
होती जाती है ~ प्रेम रस ❣️❣️
©️ प्रतिभा

3 comments:
बहुत खूबसूरत अहसास
बहुत ख़ूब
बहुत सुंदर
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