नही मालूम था
इस बरस ऐसा
बसंत आएगा
तुम्हारे रंग
और
तुम्हारी सुगंध से
मन सराबोर हो जाएगा
नही मालूम था
इस बरस
ऐसा बसंत आएगा
तुम्हारी आँखों का
अबोल देखना
थिरकती उंगलियों से
पोर पोर छू लेना
बसंत राग बन जायेगा
नही मालूम था
इस बरस
ऐसा बसंत आएगा
तुम्हारी बाँहो में
सिमट कर
तन मन तरल
हो जाएगा
महुए की डाली पर
मधुमास उतर आएगा
नही मालूम था
इस बरस
ऐसा बसन्त आएगा
प्रतिभा
नही मालूम था
4 comments:
नही मालूम था
इस बरस भी
ऐसा बसन्त आयेगा
आपके शब्दों में महक
लफ़्ज़ों की जादूगरी
छा जायेगी
शानदार लेखनी पीसी मेम
नही मालूम था
इस बरस भी
ऐसा बसन्त आयेगा
आपके शब्दों में महक
लफ़्ज़ों की जादूगरी
छा जायेगी
शानदार लेखनी पीसी मेम
जीवंत अनुभूतियों से प्राणित 👍👍👍
बहुत अच्छा
Post a Comment