Tuesday, February 12, 2019

मधुमास

नही मालूम था 
इस बरस ऐसा 
बसंत आएगा 
तुम्हारे रंग
और
तुम्हारी सुगंध से
मन सराबोर हो जाएगा 
नही मालूम था 
इस बरस
ऐसा बसंत आएगा 
तुम्हारी आँखों का 
अबोल देखना 
थिरकती उंगलियों से 
पोर पोर छू लेना 
बसंत राग बन जायेगा 
नही मालूम था 
इस बरस
ऐसा बसंत आएगा
तुम्हारी बाँहो में 
सिमट कर 
तन मन तरल 
हो जाएगा 
महुए की डाली पर 
मधुमास उतर आएगा
नही मालूम था 
इस बरस
ऐसा बसन्त आएगा

प्रतिभा

4 comments:

sahib sarkar said...

नही मालूम था
इस बरस भी
ऐसा बसन्त आयेगा
आपके शब्दों में महक
लफ़्ज़ों की जादूगरी
छा जायेगी


शानदार लेखनी पीसी मेम

sahib sarkar said...

नही मालूम था
इस बरस भी
ऐसा बसन्त आयेगा
आपके शब्दों में महक
लफ़्ज़ों की जादूगरी
छा जायेगी


शानदार लेखनी पीसी मेम

Deshi Writer said...

जीवंत अनुभूतियों से प्राणित 👍👍👍

Deshi Writer said...

बहुत अच्छा

होंठ

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