Thursday, April 18, 2019

अनुनय अभिसार का

सुनो प्रिये 
अनुनय अभिसार का
दिवस से घबराओ नही 
में आँचल की ओट कर दूँगी 
तपती सख्त धरा को 
शेफाली के फूलों की 
सेज कर दूँगी 
सुनो प्रिये 
अनुनय अभिसार का 
पत्तो की छांह से छन कर
आ रही धूप की टुकडियों को
चांदनी सा शीतल कर दूँगी
ठंडी शीतल बयार का स्पर्श दूँगी
,सुनो प्रिये
अनुनय अभिसार का
वल्लरी सी बाहों में भरकर
शुष्क अधरों को 
मधु से तर कर दूँगी 
तपते तन में 
ह्रदय गति हो रही दामनी सी
ये बिखरे केशो की अलकाएँ 
रूप यौवन की मादकताये
सब तुम पर वार दूँगी 
सुनो प्रिये
अनुनय अभिसार का 
न जाने कब
विदा क्षण आ जाये ,
उमड़ रहे इस पल
इन भावो की स्मृतियों का 
तुम्हारे मन पटल पर
पक्के प्रीत रंगों से
चित्र अंकित कर् दूँगी ,
सुनो प्रिये
अनुनय अभिसार का
प्रतिभा




2 comments:

Deshi Writer said...

सुंदर

Deshi Writer said...

सुंदर बहुत मोहक

होंठ

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