दर्द
दर्द को कभी महसूस नही किया~
इसलिए पता नही कैसा होता है !
बात बात पर आंखों के कोर से ~
पानी ढुलक जाना, और जी
हल्का होकर भी भारी हो जाना !
कहीं ये दर्द तो नही ??
आँखों में नींद लिए अनदेख वेदना~
करवटे बदलती रात के साथ~
पहरों जिस्म-ओ-जान का करवट बदलना !
कहीं ये तो दर्द नही ??
भीड़ में एकाक तन्हा हो जाना~
और फिर उसी भीड़ में ~
बनावटी मुस्कान चेहरे पर ले आना !
कहीं ये दर्द तो नही ??
अचानक विचारों का ~
अवरुद्ध हो जाना और
अभिव्यक्तियों को व्यक्त करते भी~
व्यक्त न कर पाना !
मानो भावों के भंवर में भाव शून्य हो जाना !!
कहीं ये दर्द तो नही ??
पता नही - पता नही 🙂
©️ प्रतिभा
दर्द को कभी महसूस नही किया~
इसलिए पता नही कैसा होता है !
बात बात पर आंखों के कोर से ~
पानी ढुलक जाना, और जी
हल्का होकर भी भारी हो जाना !
कहीं ये दर्द तो नही ??
आँखों में नींद लिए अनदेख वेदना~
करवटे बदलती रात के साथ~
पहरों जिस्म-ओ-जान का करवट बदलना !
कहीं ये तो दर्द नही ??
भीड़ में एकाक तन्हा हो जाना~
और फिर उसी भीड़ में ~
बनावटी मुस्कान चेहरे पर ले आना !
कहीं ये दर्द तो नही ??
अचानक विचारों का ~
अवरुद्ध हो जाना और
अभिव्यक्तियों को व्यक्त करते भी~
व्यक्त न कर पाना !
मानो भावों के भंवर में भाव शून्य हो जाना !!
कहीं ये दर्द तो नही ??
पता नही - पता नही 🙂
©️ प्रतिभा

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