Sunday, February 24, 2019

आधा चाँद

स्याह रात और आधा चांद ~
मांगता है एक पूरी रात !!
ख्वाबो की सेज पर ~
 सिरहाने आ~
मेरी आंखों में वो गुजारना 💞

प्रतिभा

Thursday, February 21, 2019

प्रेम रस

इश्क का पैमाना भर कर ,
जब से ये नशा किया है ~
कुछ मीरा सी जोगन बन गयी ,
तो कुछ राधा सी बावरी !!
इस प्रेम खुमार में बस
तुम्हे ही सोच मंद मंद मुस्काती हूं ।
बिन कोई बात नयन छलकाती हूं ।
प्रेम-गीत बना तुमको,
अधरों पर गुनगुनाती हूं ।
तुम्हारी ललित छवि नयनन में समा,
पलक ढाप एकटक निहारतीं हूं ।
पहरों एकांत में तुम से ही बतियाती हूं ।
और तुम्हारे मन को,
अपने तन की देहरी तक ला,
उससे उठती गंध को आत्मसात कर ,
' मैं '- ' तुम ' बनती जाती हूँ ।
और देह मेरी मानो बेजान
होती जाती है ~ प्रेम रस ❣️❣️

©️ प्रतिभा

Tuesday, February 12, 2019

मधुमास

नही मालूम था 
इस बरस ऐसा 
बसंत आएगा 
तुम्हारे रंग
और
तुम्हारी सुगंध से
मन सराबोर हो जाएगा 
नही मालूम था 
इस बरस
ऐसा बसंत आएगा 
तुम्हारी आँखों का 
अबोल देखना 
थिरकती उंगलियों से 
पोर पोर छू लेना 
बसंत राग बन जायेगा 
नही मालूम था 
इस बरस
ऐसा बसंत आएगा
तुम्हारी बाँहो में 
सिमट कर 
तन मन तरल 
हो जाएगा 
महुए की डाली पर 
मधुमास उतर आएगा
नही मालूम था 
इस बरस
ऐसा बसन्त आएगा

प्रतिभा

होंठ

 इक जिंदगी के राज को मेरे छुपाए होंठ कमबख्त ने इस तरह से मेरे दबाए होंठ उफ्फ फो दम ही निकल जाता  मेरा बैरी  ने  जो होंठों से मेरे मिलाए  हों...